प्रवचन और मोहिनी माया का प्रभाव
प्राचीन काल में ऋषि मुनि और संत ,महात्मा अपनी सिद्धि, तप और जप से प्राप्त ज्ञान का प्रवाह समाज में प्रवचनों द्वारा किया करते थे। ।लेकिन ऊक्त समय उनका मुख्य ध्येय था कि लोगों का बौद्धिक विकास हो और उनका मोह, माया,काम और क्रोध पर नैतिक पकड़ बनी रहे जिससे समाज में शांती ,सौहार्द ,प्रेम और इश्वर के प्रति आस्था भक्ति और विश्वास बना रहे.
परन्तु आज के कुछ संत …. जो जप, तप ,सिद्धि सब करते हैं ,पर उनका ध्येय केवल संसार को धार्मिक बाजार के रूप में स्थापित करना होता है जिसका दुष्परिणाम काफी भयानक साबित हा रहा है ,आज कल के बड़े - बड़े साधु ,संत, महाराज , लोगो को ठग रहे हैं,उनका शोषण कर रहे है और अंध विश्वास को बढ़ावा दे रहें हैं।
हाल की कुछ घटनाओं के अनुसार बड़े - बड़े साधु ,संत और महाराज आम लोगों पर मोहिनी मंत्र का प्रयोग करते हैं जिसके कारण लोग उनके बस में होकर अपने सोचने समझने की शक्ति खोकर अपना सब कुछ दान भी कर..... उसी संत के शरण में अपना जीवन एक सेवक की तरह बिता रहें हैं। ध्यान से देखें तो समाज को भक्ति और शक्ति के आधार पर कई भागों में बाटाँ गया है …कोई कृष्ण भक्ति कर रहा है, तो कोई राम भक्ति ……तो कोई हनुमान …तो कोई भगवान् शिवशंकर को ही अपनी आस्था का केंद्र मानता है। तमाम धार्मिक प्रतिनिधि लोगो को उनके आस्था के अनुरूप बाँट कर उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और आम इंसान को इश्वर के रहस्य को न समझाकर उनके लीलाओं के माया में ही फंसाए रखते हैं।
ऐसे कई उदाहरण प्रत्येक दिन टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे बाबाओं के प्रवचनों में देखे जा सकते है। अब बात आती है प्रभाव की तो एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है ……बाबाओं द्वारा लोगों पर मोहिनी जैसी विद्या का प्रयोग करने से लोग दिमागी स्तर पर काफी कमजोर होते जा रहें हैं उदाहरण स्वरुप…आशुतोष महराज के नाम से देश में विख्यात एक आम इंसान को लोग भगवान् मानते हैं , उत्तर प्रदेश के एक शहर में इनके कुछ अनुयायी हैं …जिनका कहना है कि भगवान् आशुतोष रोज़ रात को उनके सपने में आतें हैं बुलातें हैं …और योग एवं आराधना करने को कहते हैं और उनके नहीं उठने पर बाबा उनके घर के बर्तन भी फेंकते है…. उनके एक और अनुयायी के अनुसार भगवान् आशुतोष उनके इर्द गिर्द रहते हैं …उन्हे बुलाते है एवं उनके साथ खेलते हैं। इन दोनों ही भक्तों का इलाज़ करने वाले ''डॉक्टर'' का कहना हैं कि …इनके दिमाग पर भगवान् आशुतोष महाराज ने मानो कब्ज़ा कर रखा है। महाराज आशुतोष को मानने वाले उनको अवतारी पुरुष मानते हैं। आम लोगों से धर्म एवं आस्था के नाम पर करोड़ों रूपये जमा करके कहने को स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल खोलकर .... गरीबों के आड़ में अपना ही झोला भर रहे हैं। यहाँ केवल आशुतोष महाराज की ही बात नहीं है - वर्तमान समय में सबसे चर्चित बाबा आशाराम को ही ले लीजिये जिनके पास अकूत संपत्ति है और बाबा रामदेव को भी देखे तो योग सिखाते - सिखाते बिज़नेस मैन बन बैठे हैं और लोगों के पैसों से अपनी दुकान चला रहे हैं।
हमारे समाज में यह भी एक विडम्बना है कि - जब कोई धर्माधिकारी बन कर अपने इष्ट की पूजा एवं उनके व्यक्तित्व का बखान करता है तो समाज के कुछ बेचारे लोग उसे ही अपना इष्ट या भगवान् मान लेते है…और पूजना शुरू कर देतें हैं जैसे उन्हें साक्षात् ब्रम्हा मिल गएँ हों। …….देश में तेजी से बढ़ रही इस प्रकार के अन्धविश्वास को रोकने में सरकार तो असमर्थ है ही और दूसरी तरफ कुछ राजनेता इनके समर्थकों के जरिये अपनी राजगद्दी का सपना भी संजोये हुए हैं। …ज़ो हमारे समाज और देश के लिए खतरे की घंटी है।
परन्तु आज के कुछ संत …. जो जप, तप ,सिद्धि सब करते हैं ,पर उनका ध्येय केवल संसार को धार्मिक बाजार के रूप में स्थापित करना होता है जिसका दुष्परिणाम काफी भयानक साबित हा रहा है ,आज कल के बड़े - बड़े साधु ,संत, महाराज , लोगो को ठग रहे हैं,उनका शोषण कर रहे है और अंध विश्वास को बढ़ावा दे रहें हैं।
हाल की कुछ घटनाओं के अनुसार बड़े - बड़े साधु ,संत और महाराज आम लोगों पर मोहिनी मंत्र का प्रयोग करते हैं जिसके कारण लोग उनके बस में होकर अपने सोचने समझने की शक्ति खोकर अपना सब कुछ दान भी कर..... उसी संत के शरण में अपना जीवन एक सेवक की तरह बिता रहें हैं। ध्यान से देखें तो समाज को भक्ति और शक्ति के आधार पर कई भागों में बाटाँ गया है …कोई कृष्ण भक्ति कर रहा है, तो कोई राम भक्ति ……तो कोई हनुमान …तो कोई भगवान् शिवशंकर को ही अपनी आस्था का केंद्र मानता है। तमाम धार्मिक प्रतिनिधि लोगो को उनके आस्था के अनुरूप बाँट कर उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और आम इंसान को इश्वर के रहस्य को न समझाकर उनके लीलाओं के माया में ही फंसाए रखते हैं।
ऐसे कई उदाहरण प्रत्येक दिन टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे बाबाओं के प्रवचनों में देखे जा सकते है। अब बात आती है प्रभाव की तो एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है ……बाबाओं द्वारा लोगों पर मोहिनी जैसी विद्या का प्रयोग करने से लोग दिमागी स्तर पर काफी कमजोर होते जा रहें हैं उदाहरण स्वरुप…आशुतोष महराज के नाम से देश में विख्यात एक आम इंसान को लोग भगवान् मानते हैं , उत्तर प्रदेश के एक शहर में इनके कुछ अनुयायी हैं …जिनका कहना है कि भगवान् आशुतोष रोज़ रात को उनके सपने में आतें हैं बुलातें हैं …और योग एवं आराधना करने को कहते हैं और उनके नहीं उठने पर बाबा उनके घर के बर्तन भी फेंकते है…. उनके एक और अनुयायी के अनुसार भगवान् आशुतोष उनके इर्द गिर्द रहते हैं …उन्हे बुलाते है एवं उनके साथ खेलते हैं। इन दोनों ही भक्तों का इलाज़ करने वाले ''डॉक्टर'' का कहना हैं कि …इनके दिमाग पर भगवान् आशुतोष महाराज ने मानो कब्ज़ा कर रखा है। महाराज आशुतोष को मानने वाले उनको अवतारी पुरुष मानते हैं। आम लोगों से धर्म एवं आस्था के नाम पर करोड़ों रूपये जमा करके कहने को स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल खोलकर .... गरीबों के आड़ में अपना ही झोला भर रहे हैं। यहाँ केवल आशुतोष महाराज की ही बात नहीं है - वर्तमान समय में सबसे चर्चित बाबा आशाराम को ही ले लीजिये जिनके पास अकूत संपत्ति है और बाबा रामदेव को भी देखे तो योग सिखाते - सिखाते बिज़नेस मैन बन बैठे हैं और लोगों के पैसों से अपनी दुकान चला रहे हैं।
हमारे समाज में यह भी एक विडम्बना है कि - जब कोई धर्माधिकारी बन कर अपने इष्ट की पूजा एवं उनके व्यक्तित्व का बखान करता है तो समाज के कुछ बेचारे लोग उसे ही अपना इष्ट या भगवान् मान लेते है…और पूजना शुरू कर देतें हैं जैसे उन्हें साक्षात् ब्रम्हा मिल गएँ हों। …….देश में तेजी से बढ़ रही इस प्रकार के अन्धविश्वास को रोकने में सरकार तो असमर्थ है ही और दूसरी तरफ कुछ राजनेता इनके समर्थकों के जरिये अपनी राजगद्दी का सपना भी संजोये हुए हैं। …ज़ो हमारे समाज और देश के लिए खतरे की घंटी है।

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