Sunday, 25 August 2013

                                        '' संत''  , बलात्कार और राजनितीक भाषण 

मेरे    इस शीर्षक की कहानी कुछ ये है कि,- बलात्कार की शिकार एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया है कि  जिस गुरुकुल में वह कक्षा बारहवी की छात्रा है उसी के संस्थापक और संरक्षक संत  ' आशाराम '    ने उसके साथ कुकर्म किया है।  जहाँ  मामला बलात्कार का हो तो प्रतिक्रिया गंभीर होनी चाहिए..... लेकिन इस मामले में संत और उनके राजनितिक संरक्षकों की प्रतिक्रिया का कोई जवाब नहीं।
  'आशाराम'  कोई आम नागरिक तो है नहीं,,,,,,, इनके जनसमर्थन के बारे में भी लगभग सबको पता होगा - ऐसे में राजनितिक पार्टिया खासकर भाजपा तो उनके हक में ही बोलेगी।  २०१४ के चुनाव में जितने के लिए एडी चोटी   का  जोर लगा रही भाजपा के लिए एक- एक वोट जो जरुरी है ,तो वही हजारो की संख्या में 'आशाराम' के समर्थक है  "बाबा जो चाहे सो करा ले "……. जो भाजपा के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकता है।  मुद्दे की बात तो यह है की भाजपा नेता 'उमा भारती ' महिला होकर भी जोधपुर के छिंदवाडा के गुरुकुल में हुई इस बीभत्स कृत्य पर 'आशाराम' का बचाव किया, ……तो भाजपा के ही एक अन्य पार्टी  उपाध्यक्ष 'प्रभात झा 'ने बालिका के आरोप को नकारते हुए इसे 'कांग्रेसियों' का राजनितिक षड़यंत्र करार  दिया।
……महोदय जी पहली बात तो यह है कि - जहा आग लगाती है वही धुँआ उठता है , दूसरी बात की कोई नाबालिग लड़की अपने साथ हुए अत्याचार को बताती है तो उस पर सहानुभुति की जगह इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए …....खैर इस देश के नेताओ का हाल तो सभी जानते है। …. वैसे ये वही 'आशाराम' है..... जिन्होंने दिल्ली गैंग रेप की घटना पर ओछी टिप्पड़ी करते हुए कहा  कि .....पीडिता को घटना के वक़्त भैया कह कर निवेदन करना चाहिए था  कि -.... मुझे छोड़ दो। ……और तो और ये वही 'आशाराम' है... जिन्हें एक मीडिया कर्मी पर थप्पड़ जड़ते देखा गया था।  वाह रे 'संत'...... शायद 'आशारांम' संत शब्द के भाव से परिचित ही नहीं है। धर्म की चार किताबें पढ़ कर कोई संत नहीं हो जाता, जिसमे मोह -माया,  काम -क्रोध का वाश हो वह संत कहलाने के लायक नहीं है।
       जहा  तक  बात हमारे प्रतिनिधियों की है तो देश में आये दिन हो रही बलात्कार की घटनाओ पर उचित कानून बनाना तो दूर। ………हमारे राज नेता इसे गंभीरता से लेते तक नहीं है। यहाँ  इकलौते आशा राम ही नहीं है। …।बल्कि तमाम हिन्दुत्व और संत का चादर ओढ़े बाबा है , जो धर्म की आड़ में भक्षक बने बैठे है……. इनमे से तो कईयों के विडियो टेप भी देखे जा चुके है , और इन्ही के जनसमर्थन से चुनावो में बड़ी बड़ी जीत हासिल कर के कुछ राजनेता इनके संरक्षक बन बैठे है।
       जोधपुर ' छिंदवाडा   'की  घटना  को अपनी गन्दी राजनीती  से न जोड़कर नेताओ को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए और इस तरह की घटना में शामिल किसी भी अपराधी को चाहे वो कोई भी हो कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए।