Saturday, 7 September 2013

                                        
                 प्रवचन और मोहिनी माया का प्रभाव

प्राचीन  काल में ऋषि मुनि और संत ,महात्मा अपनी सिद्धि, तप और जप से प्राप्त ज्ञान का प्रवाह  समाज में प्रवचनों द्वारा  किया करते थे। ।लेकिन ऊक्त समय उनका मुख्य ध्येय था कि लोगों का बौद्धिक विकास हो और उनका मोह, माया,काम और क्रोध पर नैतिक पकड़ बनी रहे जिससे समाज में शांती ,सौहार्द ,प्रेम और इश्वर  के प्रति आस्था भक्ति और विश्वास बना रहे.
परन्तु आज के कुछ संत …. जो जप,  तप ,सिद्धि सब करते  हैं ,पर  उनका ध्येय केवल संसार को धार्मिक बाजार के रूप में स्थापित करना होता है जिसका दुष्परिणाम काफी भयानक साबित हा रहा है ,आज  कल के  बड़े - बड़े साधु ,संत, महाराज , लोगो को ठग रहे हैं,उनका शोषण कर रहे है और अंध विश्वास को बढ़ावा दे रहें हैं।
                             हाल की कुछ घटनाओं के अनुसार बड़े - बड़े साधु ,संत और महाराज आम लोगों पर मोहिनी मंत्र का प्रयोग करते हैं जिसके कारण लोग उनके बस में होकर अपने सोचने समझने की शक्ति खोकर अपना सब कुछ दान भी कर..... उसी संत के शरण में अपना जीवन  एक सेवक की तरह बिता रहें हैं। ध्यान से देखें तो समाज को भक्ति और शक्ति के आधार पर कई भागों में बाटाँ गया है …कोई  कृष्ण भक्ति कर रहा है, तो कोई राम भक्ति ……तो कोई हनुमान …तो कोई भगवान्  शिवशंकर को ही अपनी आस्था  का केंद्र मानता है।  तमाम धार्मिक प्रतिनिधि लोगो को उनके आस्था के अनुरूप बाँट कर उनकी भावनाओं  के साथ खिलवाड़ कर रहे  हैं और आम इंसान  को इश्वर के रहस्य  को न समझाकर उनके लीलाओं के माया में ही फंसाए रखते हैं।
                   ऐसे कई उदाहरण प्रत्येक दिन टेलीविज़न पर दिखाए जा रहे बाबाओं के प्रवचनों में देखे जा सकते है। अब बात आती है प्रभाव की तो एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है ……बाबाओं द्वारा लोगों पर मोहिनी जैसी विद्या का प्रयोग करने से लोग दिमागी स्तर पर काफी कमजोर होते जा रहें हैं उदाहरण स्वरुप…आशुतोष महराज के नाम से देश में विख्यात एक आम इंसान  को लोग भगवान् मानते हैं , उत्तर प्रदेश के एक शहर में इनके कुछ अनुयायी हैं  …जिनका कहना है कि  भगवान् आशुतोष रोज़ रात को उनके सपने में आतें हैं बुलातें हैं …और  योग एवं आराधना करने को कहते हैं और उनके नहीं उठने पर बाबा  उनके घर के बर्तन भी फेंकते है…. उनके एक और  अनुयायी के अनुसार  भगवान् आशुतोष उनके इर्द गिर्द रहते हैं …उन्हे बुलाते है एवं उनके साथ खेलते हैं। इन दोनों ही भक्तों का इलाज़ करने वाले ''डॉक्टर'' का  कहना  हैं कि …इनके  दिमाग पर भगवान् आशुतोष  महाराज ने मानो कब्ज़ा कर रखा है।  महाराज आशुतोष को मानने वाले उनको अवतारी पुरुष मानते हैं। आम लोगों से धर्म एवं आस्था के नाम पर करोड़ों रूपये जमा करके कहने को स्कूल, कॉलेज और हॉस्पिटल खोलकर .... गरीबों के आड़ में अपना ही झोला भर रहे हैं। यहाँ केवल आशुतोष महाराज की ही बात नहीं है - वर्तमान समय में सबसे चर्चित बाबा आशाराम को ही ले लीजिये जिनके पास अकूत संपत्ति है और बाबा रामदेव को भी देखे तो योग सिखाते - सिखाते बिज़नेस मैन बन बैठे हैं और लोगों के पैसों से अपनी दुकान चला रहे हैं।
                    हमारे  समाज में यह भी एक विडम्बना है कि - जब कोई धर्माधिकारी बन कर अपने इष्ट की पूजा एवं उनके व्यक्तित्व का बखान करता है तो समाज के कुछ बेचारे लोग उसे ही अपना इष्ट या भगवान् मान लेते है…और  पूजना शुरू कर देतें हैं जैसे उन्हें साक्षात् ब्रम्हा मिल गएँ हों। …….देश में तेजी से बढ़ रही इस प्रकार के अन्धविश्वास  को रोकने में सरकार  तो असमर्थ है ही और दूसरी तरफ कुछ राजनेता इनके समर्थकों के जरिये अपनी राजगद्दी का सपना भी संजोये हुए हैं। …ज़ो हमारे समाज और देश के लिए खतरे की घंटी है।  

Sunday, 25 August 2013

                                        '' संत''  , बलात्कार और राजनितीक भाषण 

मेरे    इस शीर्षक की कहानी कुछ ये है कि,- बलात्कार की शिकार एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया है कि  जिस गुरुकुल में वह कक्षा बारहवी की छात्रा है उसी के संस्थापक और संरक्षक संत  ' आशाराम '    ने उसके साथ कुकर्म किया है।  जहाँ  मामला बलात्कार का हो तो प्रतिक्रिया गंभीर होनी चाहिए..... लेकिन इस मामले में संत और उनके राजनितिक संरक्षकों की प्रतिक्रिया का कोई जवाब नहीं।
  'आशाराम'  कोई आम नागरिक तो है नहीं,,,,,,, इनके जनसमर्थन के बारे में भी लगभग सबको पता होगा - ऐसे में राजनितिक पार्टिया खासकर भाजपा तो उनके हक में ही बोलेगी।  २०१४ के चुनाव में जितने के लिए एडी चोटी   का  जोर लगा रही भाजपा के लिए एक- एक वोट जो जरुरी है ,तो वही हजारो की संख्या में 'आशाराम' के समर्थक है  "बाबा जो चाहे सो करा ले "……. जो भाजपा के लिए सोने पर सुहागा साबित हो सकता है।  मुद्दे की बात तो यह है की भाजपा नेता 'उमा भारती ' महिला होकर भी जोधपुर के छिंदवाडा के गुरुकुल में हुई इस बीभत्स कृत्य पर 'आशाराम' का बचाव किया, ……तो भाजपा के ही एक अन्य पार्टी  उपाध्यक्ष 'प्रभात झा 'ने बालिका के आरोप को नकारते हुए इसे 'कांग्रेसियों' का राजनितिक षड़यंत्र करार  दिया।
……महोदय जी पहली बात तो यह है कि - जहा आग लगाती है वही धुँआ उठता है , दूसरी बात की कोई नाबालिग लड़की अपने साथ हुए अत्याचार को बताती है तो उस पर सहानुभुति की जगह इस तरह के बयान नहीं देने चाहिए …....खैर इस देश के नेताओ का हाल तो सभी जानते है। …. वैसे ये वही 'आशाराम' है..... जिन्होंने दिल्ली गैंग रेप की घटना पर ओछी टिप्पड़ी करते हुए कहा  कि .....पीडिता को घटना के वक़्त भैया कह कर निवेदन करना चाहिए था  कि -.... मुझे छोड़ दो। ……और तो और ये वही 'आशाराम' है... जिन्हें एक मीडिया कर्मी पर थप्पड़ जड़ते देखा गया था।  वाह रे 'संत'...... शायद 'आशारांम' संत शब्द के भाव से परिचित ही नहीं है। धर्म की चार किताबें पढ़ कर कोई संत नहीं हो जाता, जिसमे मोह -माया,  काम -क्रोध का वाश हो वह संत कहलाने के लायक नहीं है।
       जहा  तक  बात हमारे प्रतिनिधियों की है तो देश में आये दिन हो रही बलात्कार की घटनाओ पर उचित कानून बनाना तो दूर। ………हमारे राज नेता इसे गंभीरता से लेते तक नहीं है। यहाँ  इकलौते आशा राम ही नहीं है। …।बल्कि तमाम हिन्दुत्व और संत का चादर ओढ़े बाबा है , जो धर्म की आड़ में भक्षक बने बैठे है……. इनमे से तो कईयों के विडियो टेप भी देखे जा चुके है , और इन्ही के जनसमर्थन से चुनावो में बड़ी बड़ी जीत हासिल कर के कुछ राजनेता इनके संरक्षक बन बैठे है।
       जोधपुर ' छिंदवाडा   'की  घटना  को अपनी गन्दी राजनीती  से न जोड़कर नेताओ को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व निभाना चाहिए और इस तरह की घटना में शामिल किसी भी अपराधी को चाहे वो कोई भी हो कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए।